22-08-2025 05:36 PM

BHORAMDEV MANDIR TEMPLE

छत्तीसगढ़ के कवर्धा ज़िले में स्थित भोरमदेव मंदिर एक प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है, जिसे "छत्तीसगढ़ का खजुराहो" भी कहा जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसकी स्थापत्य कला नागर एवं खजुराहो शैली से मिलती-जुलती है।

प्रमुख विशेषताएँ :

निर्माण काल – इसका निर्माण 7वीं से 11वीं शताब्दी के बीच कलचुरी राजाओं द्वारा कराया गया था।

शिवलिंग – गर्भगृह में अत्यंत प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, जिसकी नियमित पूजा-अर्चना होती है।

शिल्पकला – मंदिर की दीवारों, स्तंभों और गर्भगृह पर बनी शिल्पकृतियाँ अत्यंत आकर्षक हैं। इनमें देवी-देवताओं, अप्सराओं, नृत्य मुद्राओं और दैनंदिन जीवन की झलक मिलती है।

खजुराहो से समानता – यहाँ के शृंगारिक मूर्तिशिल्प खजुराहो मंदिरों से मिलते-जुलते हैं, इसलिए इसे "छत्तीसगढ़ का खजुराहो" कहा जाता है।

स्थान – यह मंदिर घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित है, जो इसे प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर और आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करता है।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व :

महाशिवरात्रि और अन्य शिव उत्सवों पर यहाँ भव्य मेले का आयोजन होता है।

यह मंदिर छत्तीसगढ़ की प्राचीन संस्कृति, कला और स्थापत्य का अनमोल उदाहरण है।

धार्मिक आस्था के साथ-साथ इतिहास और पर्यटन की दृष्टि से भी यह स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

? संक्षेप में, भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर है, जहाँ भक्तिभाव, कला और प्रकृति का अद्भुत

संगम देखने को मिलता है।

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